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लोकसभा चुनाव 2019: इस बार किस रंग में रंगेगी सीधी सीट

सीधी सीट पर कभी किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा, अब तक के 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा है

सीधी- मध्य प्रदेश की सीधी लोकसभा सीट अहम लोकसभा सीटों गिनी जाती है. ये ऐसी सीट रही है जिस पर कभी किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा. अब तक के 16 लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा है. हालांकि बीजेपी यहां पर पिछले 2 चुनाव जीतने में सफल रही है. 2019 का चुनाव जीतकर उसकी नजर यहां पर हैट्रिक लगाने पर होगी तो कांग्रेस यहां पर वापसी करने की आस में है.

लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. एक एक सीट पर कांटे की लड़ाई मानी जा रही है. इन्ही में से एक सीट है सीधी. कांग्रेस और बीजेपी दोनों इस सीट को जीतने का दावा तो कर रही हैं, लेकिन इतिहास बताता है कि यहां के मतदाताओं ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को बराबर का अधिकार दिया है.

सीधी सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव 1962 में हुआ था.
– 1962 के बाद अब तक हुए 16 चुनाव हुए
– 6 बार कांग्रेस और 6 बार बीजेपी को मिली जीत
– इस सीट पर अब तक 3 ही कैंडिडेट दोहरा पाए जीत
– जिसमें बीजेपी के जगन्नाथ सिंह, चंद्रप्रताप सिंह और कांग्रेस मोती सिंह शामिल
– 1962 में आनंद चंद्रा, 1967 में बीपी सिंह के साथ कांग्रेस के कब्जे में रही सीधी सीट
– 1971 से 1979 तक अन्य पार्टियों का रहा कब्जा
– 1980 और 1984 में मोती लाल कांग्रेस के टिकट पर रहे सांसद
– 1989 मे पहली बार बीजेपी का खुला खाता, जगन्नाथ सिंह जीते
– 1991 मे फिर कांग्रेस के कब्जे में आई तीसरी बार मोती लाल सिंह बने सांसद
– 1996 के चुनाव में फिर बीजेपी- कांग्रेस से जनता को हुआ परहेज
– 1998 में दूसरी बार बीजेपी का चमका चांद जगन्नाथ सिंह जीते
– 1998 के बाद 1999, 2004 में लगातार 3 बार रहा बीजेपी का कब्जा
– 2007 में हुए बायपॉल में कांग्रेस ने किया कब्जा
– 2009 में बीजेपी ने कांग्रेस को चटाई धूल, 2014 में मोदी लहर ने लहराया बीजेपी का झंडा
– सीधी लोकसभा में 8 चुरहट, चित्रांगी, धौहानी, सिद्दी, सिंगरौली, ब्‍यौहारी, सिहावल, देवसर 8 सीटें हैं
– 8 सीटों में से 7 पर बीजेपी और 1 पर कांग्रेस का कब्जा

वहीं अगर सीधी सांसद रीति पाठक के रिपोर्ट कार्ड की बात करें तो,
-2014 लोकसभा चुनाव में 108046 वोटों से जीती रीति पाठक
-एलएलबी की पढ़ाई कर चुकीं रीति पाठक की संसद में उपस्थिति 95 फीसदी रही
– इस दौरान उन्होंने 338 सवाल 93 डिबेट में हिस्सा लिया
– पाठक ने निर्भया फंड, ई-वीजा, मध्य प्रदेश में खेल को बढ़ावा, जैसे मुद्दों पर सवाल किया

सीधी जिले के विधानसभा परिणाम ने जहां बीजेपी का कॉन्फिडेंस बढ़ाया है तो वहीं एट्रोसिटी पर हुए बवाल ने बीजेपी की परेशानी भी बढ़ाई है. कई बार ब्राह्मण समाज के लोगों ने रीति पाठक का विरोध किया है जिसमें एक बार तो सासंद ने नाराज ब्राह्मण समाज के लोगों से कहा कि तलवार लाओ मेरा सर उतार लो.

संसदीय क्षेत्र के विकास की बात करें तो रेल यहां का मुद्दा हमेशा बना रहा लेकिन केंद्र में राज्य में बीजेपी सरकार होने के बावजूद सीधी के लोग रेल से अब भी वंछित हैं. तो एक ओर विकास न होने से सांसद जी को जनता की नाराजगी उठानी पड़ सकती है.

वहीं कांग्रेस से इस बार मंत्री कमलेश्वर पटेल के भाई श्रीमान पटेल ताल ठोक रहे हैं, जोकि वर्तमान में सिंहावल में जनपद पंचायत अध्यक्ष हैं. अब ऐसे में इस सीट पर कब्जा करने बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही रणनीति बना रहे हैं. कुल मिलाकर दावे कुछ भी हों, लेकिन अब ये तो वक्त ही बताएगा कि सीधी का इतिहास. क्या दोहराता है. 6-6 की रेस में, आखिर कौन आगे निकलता हैंl

✍✍✍प्रकाश यादव

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